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Sunday, January 24, 2010

GREATEST CHASES TOM&JERRY

  • जब टॉम ने १९४० में पहली बार जीरी को निवाला बनाना चाह था . ये हसरत आज लगभग ६९  वर्ष बाद भी बनी हुई है . चूहे बिल्ली की ये मस्ती व शैतानियों से भरी दौढ आज भी जीवित  है.

Thursday, January 21, 2010

Deemed to University

डीम्ड  यूनिवर्सिटी का प्राविधान यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यू.जी.सी)अधिनियम १९५६ के अंतर्गत बेहतरीन काम करने वाले कोल्लेजेस को डीम्ड यूनिवेर्सिटी का दर्जा देने का प्राविधान है. जिन्हें ये सोयात्ता  मिली है . उन्हें पेपर करना,परीक्षा करना तथा डिग्री देने का अधिकार है.सोयेत्ता देने के लिए यू.जी.सी. की टीम का गठन किया जाता है .जब कॉलेज सरे मानक पूरे कर लेता है तब डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलता है. और किसी भी यूनिवर्सिटी से सम्बधता की आवोश्यकता नहीं होती है.कुछ समय के बाद केंद्र सर्कार ने यूनिवर्सिटी और डीम्ड यूनिवर्सिटी में भ्रम पैदा होने से इन्हें डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी लिखने को कहा गया .देश के ४४ संस्थानों की मान्यता समाप्त कर दी गयी जिसमे १६ डीम्ड यूनिवर्सिटी तमिलनाडु से और बाकि १२ प्रदेशो से है.हर साल अ.इ.सी.टी.और यू.जी.सी. से संबध कराया जाता है इसकी कार्यप्रणाली अत्यंत जटिल है.इसे ठीक करने की बजाय इसे एक लाइन का आदेश पारित कर समाप्त करना चाहती है.इतने चैनल्स पार करने के बाद संस्था की  शिक्षा एक दम से घटिया क्यों हो गयी?संस्थाओ के निजीकरण से वेओसयेकरण होने के कारन टीचर्स का शोषण बढ़ा है .साथ ही सिक्षा का इसतर गिरा है.मान्यता देने से पूर्व छानबीन करना चाहिए प्रतिबन्ध लगाना समस्या का हल नहीं है.जो संस्थाए धन उगाही कर रही है ,शोषण कर रही है एवं छात्रों के साथ खिलवार कर रही है उनके विरुद्ध ज़रूर कार्यवाही होनी चाहिए . अगर सर्कार का रविया ऐसा ही रहा है तो छात्र हमेशा दिग्भ्रमित रहेगा और सभी का डीम्ड यूनिवर्सिटी से भरोसा उठ जायेगा . उच्च सिक्षा  के प्रोत्साहन के लिए जो यू.जी.सी.ने डीम्ड का प्राविधान किया है उसे समाप्त कर देना चाहिए .उच्च सिक्षा के फिएल्ड में कोई विकासात्मक कार्य नहीं हो रहा है.जटिल नियम बनाने एवं एक तरफ़ा कार्यवाही से समस्या बढती जायगी .हलाकि सर्कार ने कहा है की ४४ डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा समाप्त कर उनसे संबधित यूनिवर्सिटी से संबध कर दिया जायेगा.(Dilshad Ahmad Ansari)

Tuesday, January 19, 2010

सपा का आन्दोलन




आज दिनाक १९.१.२००१ दिन मंगलवार को प्रदेश सरकार (बसप ) की नितिओ के विरुद्ध आन्दोलन लखनऊ में किया आन्दोलन करना ,अपनी बात को कहना और हक की लड़ाई लड़ना अछी बात है। मगर ऐसा आन्दोलन किस काम का जिसके लिए लड़ाई लड़ रहे है इस आन्दोलन से जनता को कितनी परेशानी हुई इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता । सवेरे से ऑफिस ,स्कूल,हॉस्पिटल,आवश्यक सेवाए ,स्टेशन तक पहुचना ,देनिक मजदूर एवं बचचो का कनवेंस स्कूल न पहुचने से उनका रोना इत्यादि । पूरी तरेह से परभावित हुआ । मेरा यह कहना है कीजब सपा सत्ता में थी तब क्या सही है या क्या गलत है समझ में नहीं आया था । अगर उनकी नीतिया ठीक थी । तो वे सत्ता से बाहर क्यों हो गए । यदि उनकी नीतिया सही होती तो वे सत्ता से कभी बाहर नहीं जाते । यदि आन्दोलन करना ही है तो जो जीत कर आये है (मुख्या मंत्री ,मंत्री एवं सरकार के सहयोगी ) उनके आवासों,का घेराव करना चाहिए और जब तक आप की नीतियों से सहमत न हो जाए तब तक कही उन्हें आने जाने देना नहीं चाहिए । सत्ता के लोभ में बेचारी जनता को अनुचित परेशां नहीं करना चाहिए। इस बात का ख्याल सभी राजनातिक दलओ को होना चाहिए। (डॉ.दिलशाद अहमद अंसारी)

Thursday, January 14, 2010

आर.टी.आई.के दायरे में चीफ जस्टिस का पद एक अहम् फैसला

प्रधान नयधीश का पद सूचना के अधिकार के दाएरे में आता है । इसके अंतर्गत नयाधीशो की सम्पति का विवरण हासिल होना चाहिए । ऐसा दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है। इसके पहले प्रधान नयधीश के.जी.बलाक्रिसनन ने इसका विरोध किया था। एक अहम् फैसले में तीन जजों की बेंच जिसमे मुख्या न्याधीश ऐ.पी.शाह ,न्यामुर्ती विक्रमजीत एवं न्यामुर्ती मुरलीधर की पीठ ने ८८ पन्नो में अपना फैसला सुनते हुए कहा क़ि नेएक स्वतंत्रता किसी न्याधीश का विशेषाधिकार नहीं बल्कि उसे सौपी गयी जिम्मेदारी है। इस विषय में मेरा मानना है क़ि जितनी बड़ी जिम्मेदारी होती है उतनी अधिक उसकी जिम्मेदारी होती है। चिंताजनक बात यह है क़ि जादा से जादा अधिकार चाहते है मगर जवाबदेही से बचना चहते है । इसका आशय यह हुआ क़ि बनाये गए कानून के प्रति इमानदार नहीं है । इस फैसले से जरूर क्रांति आयेगी। (डॉ.दिलशाद अहमद अंसारी)

Monday, January 11, 2010

लखनऊ यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग से डॉ.रमेश चंदर त्रिपाठी हटे .

लखनऊ यूनिवेर्सिटी में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में कार्यरत डॉ.आर .सी.त्रिपाठी को मास्टर आफ मॉस कमुनिकेशन से गुरु जम्ब्श्वर यूनिवर्सिटी ,हिसार की फर्जी डिग्री पाए जाने पर दिनांक ०८/०१/२०१० को कार्य परिषद् ने हटा दिया है.अब वे हिंदी विभाग में रीडर के पद पर कार्य करेगे । मेरा इस विषय में यह मानना है की नियुक्ति के पूर्वे इसे जाँच लेना चाहिए .इतनी लम्बी सेवा के उपरांत कर्यवाही उचित नहीं है। केओकि संस्ता के बारे में छात्र जीवन में पता नहीं चलता की किस प्रकार की संसता से डिग्री ले रहा है । ऐसी संसथाओ के विरुद्ध कारवाही होना चाहिए। जब किसी पद पर पहुचने के बाद फर्जी डिग्री का मामला सामने आता है तब समाज में गलत सन्देश जाता है साथ ही वेयक्ति की छवि धूमिल होती है। डॉ.त्रिपाठी ने मेरे साथ १९९० में परीक्षा का कार्य किया है। वे अज्ञानता में फस गए । उन्होंने भी इस बात को सुविकारा है। वे एक आचे इन्सान है। (डॉ.दिलशाद अहमद अंसारी)

Wednesday, January 6, 2010

विद्यांत हिन्दू डिग्री कॉलेज का स्थापना दिवस


लखनऊ में लाटूश रोड स्थित विद्यांत हिन्दू डिग्री कॉलेज का ७२वा स्थापना दिवस मंगलवार ५ जनवरी २०१० को मनाया गया। कॉलेज के संस्थापक विक्टर नारायण विद्यांत के पिता अभिनता थे जिन्होंने सिटी की कई बिल्डिंग्स बनवाई। पिता पछिम बंगाल के शांतिपुर से आ कर बसे थे। पिता राम गोपाल विद्यांत का चारबाग , पक्का पुल, हजरतगंज स्तिथ इलाहबाद बैंक, सेंट्रल बैंक सहित कई इमारते बनवाने का योगदान है पुत्र विक्टर नारायण विद्यांत दो दिन अवैतनिक मैजिसस्ट्रेट रहे। उसके बाद न कोई बिज़नस किया न ही कोई नौकरी की। वे समाजकार्य में लग गए । उन्होंने १९३८ में विद्यांत स्कूल की शुरुवात की साथ ही शशि भूषण गिर्ल्स स्कूल की नीव रक्खी .१९४६ में इंटर कॉलेज १९५४ में डिग्री कॉलेज बना। कोम्मेर्स की पढाई १९७४से सुरु हुई .अब पी.जी.कॉलेज है.स्टेट गवेर्न्मेंट ने हाल ही में "अ "ग्रेड का दर्जा दिया है। सुनील शास्त्री & अजाज़ रिज़वी स्टुडेंट रहे। स्थापना दिवस के अवसर पर वी.सी.मनोज कुमार मिश्रा ,डॉ.दिनेश शर्मा महापौर के आलावा महाविदलय के लेक्टुरेर्स मौजूद रहे। यहाँ के प्रवक्ता डॉ.लोव्लेश अस्थाना ,डॉ.राजीव शुक्ल, डॉ.पंकज कुमार एवं डॉ.विजय कारन आदि हेअल्पिंग प्रवित्ति का है। (डॉ.दिलशाद अहमद अंसारी)

Sunday, January 3, 2010

प्रोफ. वी.डी.पांडे का निधन


लखनऊ उनिवेर्सिटी लखनऊ (उत्तर प्रदिएश) इंडिया के प्रोफ्फेसर वी .डी .पांडे का निधन २ जनुअरी २०१० शनिवार दोपहर १२ बजे हो गया इनका रेतैर्मेंट जून २०१० में था .प्रोफ पांडे मध्यकालीन &आधुनिक इतिहास विभाग के अतिरिक्त तथा कला संकाय ड़ीन के अलावा १९९९ से ६ साल तक परीक्षा नियंत्रक के पद पर काम किया .मुझे भी प्रोफ.पांडे के साथ अ.ओ.स.डी। के रूप में काम करने का मौका मिला .वे सब से प्यार से मिलते और काम जा कर खुद से करते .सभी कर्मचारियो को वरीयता देते और उन पर भोरासा रखते .अगर कोई नहीं अत तो वे उसका भी काम करते .जहा तक मई जनता हूँ की उन्होंने सभी का भला किया है और परीक्षा में अमूल -चूल परिवर्तन किया .प्रोफ.पांडे जैसा वक्तितो मिल पाना कठिन है .(डॉ.दिलशाद अहमद अंसारी)

Friday, January 1, 2010

मुहर्रम २८.१२.२००९


इमामबारा एस्टेट गोरखपुर (उ.प.) के सज्जदानाशैं अदनान फारुख अली शाह मिया बाबा मुहर्रम की दसवी (२८.१२.२००९) के जलूस में